RRB NTPC ANCIENT HISTORY PREVIOUS YEAR QUESTION P10

ANCIENT HISTORY

 (प्राचीन इतिहास)

RRB NTPC परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए प्राचीन भारतीय इतिहास (Ancient History) एक महत्वपूर्ण विषय है। परीक्षा में अक्सर प्राचीन सभ्यताओं, साम्राज्यों, महापुरुषों और सांस्कृतिक विकास से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। पिछले वर्षों के प्रश्नों (Previous Year Questions) का अध्ययन करना न सिर्फ परीक्षा पैटर्न को समझने में मदद करता है बल्कि महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी देता है।

271. प्रसिद्ध कन्नड़ नाटक ‘तुगलक’, जिसका अन्य भारतीय भाषाओं में भी मंचन किया गया है, के लेखक कौन हैं ?

(a) चंद्रशेखर कंबार

(b) गिरीश कर्नाड

(c) शिव के कुमार

(d) मस्ती वेंकटेश अयंगर

Ans (b) गिरीश कर्नाड

[RRB NTPC, 14 Mar 2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- नाटक ‘तुगलक’ गिरीश कर्नाड द्वारा 1964 में लिखा गया था। यह 14वीं शताब्दी के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक (शासनकाल 1325–1351 ई.) के जीवन और नीतियों पर आधारित है। कर्नाड आधुनिक कन्नड़ साहित्य के प्रमुख नाटककार थे और उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला था। ‘तुगलक’ उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है, जिसे कई भारतीय भाषाओं में मंचित किया गया। नाटक में तुगलक की आदर्शवादी सोच और उसकी विफल नीतियों की व्यंग्यात्मक प्रस्तुति की गई है। यह नाटक भारतीय रंगमंच का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।

272. किस सम्राट ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानान्तरित की थी ?

(a) फिरोजशाह तुगलक

(b) अलाउद्दीन

(c) मुहम्मद बिन तुगलक

(d) मुहम्मद गोरी

Ans. (c) मुहम्मद बिन तुगलक

RRB Group-D 01-10-2018 (Shift-1)

RRB Group-D 03-10-2018 (Shift-1)

RRB Group-D 03-10-2018 (Shift-3)

[RRB NTPC 10.02.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- मुहम्मद बिन तुगलक, जिसने 1325 से 1351 तक शासन किया, ने 1327 ई. में राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की। उसका उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत दोनों पर समान नियंत्रण स्थापित करना था। दिल्ली से दौलताबाद की दूरी लगभग 1500 किमी थी, जिससे लोगों को अत्यधिक कष्ट हुए। पानी की कमी और लंबी यात्रा के कारण योजना विफल साबित हुई। कुछ वर्षों बाद राजधानी पुनः दिल्ली लौटा दी गई। इस निर्णय को उसके शासनकाल की सबसे असफल नीतियों में गिना जाता है।मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने साम्राज्य के बेहतर प्रशासन हेतु राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) स्थानांतरित की, लेकिन यह योजना असफल रही।

273. मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली से अपनी राजधानी किस स्थान पर बदली ?

(a) दौलताबाद

(b) औरंगाबाद

(c) इलाहाबाद

(d) सहारनपुर

Ans. (a) दौलताबाद

[RRB NTPC 16.04.2016 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- मुहम्मद बिन तुगलक ने 1327 ई. में प्रशासनिक दक्षता के लिए राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित की। उसका मानना था कि साम्राज्य का मध्य भाग दक्षिण भारत पर बेहतर नियंत्रण देगा। लेकिन जनता को कठोर परिस्थितियों में दिल्ली छोड़ने पर मजबूर किया गया। लंबी दूरी और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण भारी जनहानि हुई। कुछ वर्षों बाद तुगलक ने इसे विफल मानते हुए राजधानी वापस दिल्ली कर दी। यह योजना इतिहास में उसकी सबसे विवादित नीति के रूप में जानी जाती है।

274. चौदहवीं शताब्दी के दौरान भारत में किसने सोने व चांदी की नियमित मुद्राओं के स्थान पर सस्ती धातुओं से निर्मित सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) का उपयोग शुरु किया था ?

(a) फिरोजशाह तुगलक

(b) मुहम्मद बिन तुगलक

(c) जलालुद्दीन खिलजी

(d) अलाउद्दीन खिलजी

Ans. (b) मुहम्मद बिन तुगलक

[RRB NTPC 08.04.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- मुहम्मद बिन तुगलक ने 1329–1330 ई. के आसपास तांबे और पीतल की सांकेतिक मुद्रा जारी की। उद्देश्य था कि सोने-चाँदी की कमी को पूरा किया जाए और अर्थव्यवस्था में अधिक मुद्रा उपलब्ध हो सके। लेकिन टकसाल व्यवस्था मजबूत न होने से नकली सिक्कों की भरमार हो गई। इससे बाजार में अराजक स्थिति पैदा हो गई और व्यापार ठप होने लगा। अंततः सरकार को इन तमाम सिक्कों को वापस लेना पड़ा। यह आर्थिक नीति उसकी सबसे बड़ी असफलता कहलाती है।

275. आगरा शहर को किसने बसाया ?

(a) आलम शाह

(b) सिकंदर लोदी

(c) बहलोल लोदी

(d) इब्राहिम लोदी

Ans. (b) सिकंदर लोदी

RRB Group-D 19-09-2018 (Shift-2)

[RRB NTPC 10.02.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- सिकंदर लोदी, जिसने 1489 से 1517 ई. तक शासन किया, ने 1504 ई. में आगरा शहर की स्थापना की। आगरा गंगा–यमुना दोआब में स्थित होने के कारण अत्यंत रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। लोदी ने इसे प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया। बाद में मुगलों ने भी इसे अपनी राजधानी बनाया और यहीं ताजमहल व किले जैसी ऐतिहासिक इमारतें बनीं। आगरा की नींव ने उत्तर भारतीय शहरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए सिकंदर लोदी को आगरा का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

276. कुतुब मीनार के पास स्थित कौन सी मस्जिद के बारे में यह माना जाता है कि वह दिल्ली में बनने वाली पहली मस्जिद थी ?

(a) शाही अताला मस्जिद

(c) अदीना मस्जिद

(b) नाखुदा मस्जिद

(d) कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद

Ans. (d) कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद

[RRB NTPC 21.01.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण 1193 ई. में दिल्ली सल्तनत के संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया। यह दिल्ली की पहली मस्जिद मानी जाती है और कुतुब परिसर का पहला स्थापत्य है। इसके निर्माण के समय कई हिंदू-जैन मंदिरों के अवशेषों का उपयोग किया गया। यह मस्जिद गुलाम वंश (1206–1290 ई.) की प्रारंभिक स्थापत्य शैली का आदर्श उदाहरण है। कुतुब मीनार भी इसी परिसर में स्थित है, जो उसी काल का प्रतीक है। यह स्थल दिल्ली सल्तनत की नींव का ऐतिहासिक साक्ष्य है।

277. इनमें से किसने अजमेर में अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ निर्मित कराया था ?

(a) नूरजहाँ

(b) कुतुबुद्दीन ऐबक

(c) अलाउद्दीन खिलजी

(d) रजिया सुल्तान

Ans. (b) कुतुबुद्दीन ऐबक

[RRB NTPC 01.02.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- अजमेर स्थित ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ का निर्माण 1199 ई. के आसपास कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया। यह मूलतः एक प्राचीन संस्कृत विद्यालय था, जिसे बाद में मस्जिद में बदला गया। इसके स्तंभों में हिंदू-जैन मंदिरों की कलात्मक शैली स्पष्ट दिखाई देती है। नाम के पीछे मान्यता है कि इसका प्रमुख भाग ढाई दिन में तैयार हुआ। यह स्थापत्य कला सल्तनत काल की प्रारंभिक तकनीकों को दर्शाती है। Iltutmish ने भी बाद में इसकी सजावट बढ़ाई।

278. कुतुब मीनार जो दुनिया की सबसे ऊँची इंटों की मीनार है। इसका निर्माण 1193 में दिल्ली सल्तनत के किस संस्थापक के आदेशों के तहत किया गया था ?

(a) फिरोज शाह तुगलक

(b) कुतुब-उद्-दीन ऐबक

(c) इल्तुतमिश

(d) कुअली कुतुब शाह

Ans. (b) कुतुब-उद्-दीन ऐबक

[RRB NTPC 29.04.2016 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- कुतुब मीनार का निर्माण 1193 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू करवाया। ऐबक ने केवल आधार और पहला तल बनवाया था। उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश (शासनकाल 1211–1236) ने शेष तीन तल पूरे कराए। यह मीनार मुस्लिम शासन की विजय का प्रतीक मानी जाती है और लाल बलुआ पत्थर से निर्मित विश्व की सबसे ऊँची ईंट की मीनार कही जाती है। कुतुब परिसर 1993 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित हुआ। इसका निर्माण सल्तनत काल की स्थापत्य श्रेष्ठता को दर्शाता है।

279. कुतुब मीनार का निर्माण किसने पूरा करवाया था ?

(a) नासीरुद्दीन मुहम्मद

(b) फिरोज शाह तुगलक

(c) कुतुबुद्दीन ऐबक

(d) मुहीउद्दीन मुहम्मद

Ans. (b) फिरोज शाह तुगलक

[RRB NTPC 30.01.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- फिरोज शाह तुगलक, जिसका शासन 1351 से 1388 तक चला, ने 1369 ई. में बिजली गिरने से क्षतिग्रस्त हुई कुतुब मीनार की मरम्मत कराई। उसने मीनार के ऊपरी हिस्से का पुनर्निर्माण करवाकर पाँचवाँ तल जोड़ा। इससे मीनार का अंतिम रूप तय हुआ, जो आज दिखाई देता है। ऐबक और इल्तुतमिश के बाद संरचना को स्थायित्व प्रदान करने का श्रेय फिरोज शाह को जाता है। उसने सल्तनत काल में कई धरोहरों की मरम्मत कराई थी। कुतुब मीनार उसके संरक्षण कार्यों का प्रमुख उदाहरण है।

280. “अढ़ाई दिन का झोपड़ा” कहां स्थित है ?

(a) आगरा

(b) अजमेर

(c) अहमदाबाद

(d) माउंट आबू

Ans. (b) अजमेर

[RRB NTPC 03.04.2016 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- ‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा’ राजस्थान के अजमेर में स्थित है, जिसका निर्माण 1199 ई. के आसपास हुआ। यह मूल रूप से एक संस्कृत विद्यालय था, जिसे कुतुबुद्दीन ऐबक के काल में मस्जिद में बदला गया। बाद में इल्तुतमिश ने इसकी सजावट और मेहराबें जोड़वाईं। इसमें हिंदू-जैन शैली के स्तंभ और नक्काशियाँ साफ दिखाई देती हैं। नाम के पीछे लोकमान्यता है कि इसका प्रमुख निर्माण ढाई दिन में संपन्न हुआ। यह अजमेर की सबसे महत्वपूर्ण सल्तनतकालीन धरोहरों में से एक है।

281. भारतीय-इस्लामी शिल्पकला जो कुतुब मीनार एवं अलाई दरवाजा जैसे स्मारकों में दृष्टिगोचर है, भारत के किस युग से संबंधित है ?

(a) वैदिक युग

(b) दिल्ली सल्तनत

(c) मुगल युग

(d) आधुनिक भारतीय युग

Ans. (b) दिल्ली सल्तनत

[RRB NTPC 22.04.2016 (Shift-3) Stage 1st]

Explain :- कुतुब मीनार (1193 से शुरू) और अलाई दरवाज़ा (1311 ई.) दोनों दिल्ली सल्तनत काल की भारतीय-इस्लामी स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इस काल की विशिष्टता में लाल बलुआ पत्थर, अरबी-कुफ़ी लेखन, घोड़े की नाल आकार की मेहराबें और जटिल ज्यामितीय नक्काशी शामिल थी। गुलाम वंश से लेकर खिलजी और तुगलक तक, सभी सल्तनत शासकों ने वास्तुकला में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अलाई दरवाज़ा खिलजी शासक अलाउद्दीन खिलजी के काल में बना, जबकि कुतुब मीनार ऐबक और इल्तुतमिश की देन है। इसलिए यह स्थापत्य 12वीं से 14वीं शताब्दी के दिल्ली सल्तनत युग से संबंधित है।

282. कृष्णदेव राय वंश से संबंधित थे।

(a) तुलुव

(b) सालुव

(c) गजपति

(d) संगमा

Ans. (a) तुलुव

[RRB NTPC 16.06.2022 (Shift-1) Stage-2nd]

Explain :- कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के तुलुव वंश के सर्वाधिक शक्तिशाली शासक थे। उनका शासनकाल 1509 से 1529 ई. तक रहा और इसे साम्राज्य का “स्वर्ण युग” कहा जाता है। उनके समय में हम्पी सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हुआ। वे स्वयं विद्वान, साहित्य-प्रेमी और कुशल प्रशासक थे, और तेलुगु काव्य “आमुक्तमाल्यदा” के रचयिता भी माने जाते हैं। तुलुव वंश ने संगम और सालुव वंशों के बाद सत्ता संभाली। उनके शासन में दक्षिण भारत कला, संगीत और स्थापत्य में बहुत आगे बढ़ा।

283. निम्नलिखित में से किस धरोहर स्थल में वास्तुकला की द्रविड़ स्थापत्य शैली है ?

(a) एलोरा

(b) हम्पी

(c) कोणार्क

(d) खजुराहो

Ans. (b) हम्पी

[RRB NTPC 08.01.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- हम्पी के मंदिर और स्मारक विशुद्ध द्रविड़ स्थापत्य शैली के उदाहरण हैं, जो विजयनगर साम्राज्य (1336–1646) के समय विकसित हुई। इस शैली की पहचान ऊँचे गोपुरम्, पत्थरों की नक्काशी और बड़े प्रांगण से होती है। हम्पी की रचनाएँ मुख्यतः संगम, सालुव और तुलुव वंशों के शासनकाल में बनीं। पत्थर का उपयोग और विशाल परिसर इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। विरुपाक्ष मंदिर, विट्ठल मंदिर और अन्य संरचनाएँ इस शैली का सर्वोत्तम रूप दर्शाती हैं। 1986 में हम्पी को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया।

284. विठ्ठल मंदिर, स्मारकों के इनमें से किस समूह में शामिल है ?

(a) हम्पी में स्थित स्मारकों के समूह

(b) महाबलीपुरम में स्थित स्मारकों के समूह

(c) पट्टदकल में स्थित स्मारकों के समूह

(d) खजुराहो में स्थित स्मारकों के समूह

Ans. (a) हम्पी में स्थित स्मारकों के समूह

[RRB NTPC 11.03.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- विठ्ठल मंदिर हम्पी के प्रसिद्ध स्मारकों के समूह का प्रमुख हिस्सा है, जो विजयनगर साम्राज्य की राजधानी रहा। इसका निर्माण मुख्यतः 15वीं सदी में देव राय द्वितीय और बाद में कृष्णदेव राय के काल में आगे बढ़ा। यह मंदिर अपनी अद्वितीय पत्थर की रथ-रचना और संगीत स्तंभों के लिए विश्वप्रसिद्ध है। हम्पी के समस्त स्मारक 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किए गए। विठ्ठल मंदिर विजयनगर स्थापत्य की सर्वोच्च कला का प्रतीक माना जाता है। यह वास्तुकला द्रविड़ शैली की परंपरा पर आधारित है।

285. हम्पी का विरूपाक्ष मंदिर किसे समर्पित है ?

(a) भगवान शिव

(b) भगवान गणेश

(c) भगवान विष्णु

(d) भगवान ब्रह्मा

Ans. (a) भगवान शिव

[RRB NTPC 08.01.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- विरुपाक्ष मंदिर हम्पी का सबसे प्राचीन और जीवंत मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इसका प्रारंभिक इतिहास 7वीं सदी से जुड़ा माना जाता है, जबकि इसका भव्य विस्तार विजयनगर साम्राज्य के काल—विशेषकर 14वीं–16वीं सदी में—हुआ। यह मंदिर हम्पी के धार्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध रहा और कृष्णदेव राय ने भी इसका विस्तार कराया। इसकी द्रविड़ शैली के गोपुरम् और पत्थर की नक्काशी इसे विशेष बनाते हैं। आज भी यहाँ नियमित पूजा होती है, जिससे यह दक्षिण भारत के सबसे पुराने सक्रिय मंदिरों में गिना जाता है।

286. बुक्का प्रथम (Bukka-I) प्राचीन भारत के इनमें से किस राजवंश का संस्थापक था ?

(a) सालुव

(b) संगम

(c) तुलुव

(d) अराविडू

Ans. (b) संगम

[RRB NTPC 09.03.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- बुक्का राय प्रथम अपने भाई हरिहर प्रथम के साथ विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक थे। दोनों भाइयों ने 1336 ई. में संगम वंश की स्थापना की, जिससे दक्षिण भारत में एक शक्तिशाली हिंदू साम्राज्य उभरा। संगम वंश 1485 तक चला और इसी वंश ने विजयनगर की राजधानी हम्पी को विकसित किया। बुक्का प्रथम ने व्यापक प्रशासनिक और सैन्य सुधार किए। उनके शासनकाल में संत विद्यारण्य का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। संगम वंश के बाद सालुव और फिर तुलुव वंश सत्ता में आए।

287. बहमनी साम्राज्य की स्थापना किसने की थी ?

(a) अलाउद्दीन बहमन शाह (उर्फ़ हसन गंगू)

(b) मीर जाफर

(c) मोहम्मद बिन तुगलक

(d) फ़िरोज़शाह बहमनी

Ans. (a) अलाउद्दीन बहमन शाह (उर्फ़ हसन गंगू)

[RRB NTPC 29.01.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- बहमनी साम्राज्य की स्थापना 1347 ई. में हसन गंगू, जिन्हें अलाउद्दीन बहमन शाह भी कहा जाता है, ने की। इसका पहला राजधानी केंद्र गुलबर्गा (कल्याणी) था, बाद में बीदर राजधानी बनी। यह दक्षिण भारत का पहला स्वतंत्र मुस्लिम साम्राज्य था, जो दिल्ली सल्तनत से अलग होकर बना। बहमनी राज्य 1527 तक चला और बाद में पाँच दक्कनी सुल्तानतों में विभाजित हो गया। स्थापत्य, प्रशासन और दक्कनी संस्कृति के विकास में बहमनियों की बड़ी भूमिका रही। उनके शासनकाल ने दक्कन में नई धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएँ स्थापित कीं।

288. प्राचीन भारत में वीर नरसिंह इनमें से किस राजवंश के शासक थे ?

(a) तुलुव

(b) सालुव

(c) संगम

(d) अराविडु

Ans. (a) तुलुव

[RRB NTPC 02.03.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- वीर नरसिंह तुलुव वंश के संस्थापक शासक थे, जिन्होंने 1505 ई. के आसपास विजयनगर की सत्ता संभाली। उन्होंने संगम और सालुव वंश के बाद साम्राज्य को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बाद सबसे प्रसिद्ध तुलुव शासक कृष्णदेव राय हुए, जिनके शासन में विजयनगर साम्राज्य अपने चरम पर पहुँचा। वीर नरसिंह ने हम्पी के प्रशासन और सैन्य संगठन को मजबूत किया। तुलुव वंश 1570 तक विजयनगर पर शासन करता रहा। इस वंश ने कला, साहित्य और द्रविड़ स्थापत्य को नई ऊँचाई दी।

289. हम्पी, _______ साम्राज्य की राजधानी थी।

(a) विजयनगर

(b) परमार

(c) राष्ट्रकूट

(d) चोल

Ans. (a) विजयनगर

[RRB NTPC 31.01.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी, जिसकी स्थापना हरिहर और बुक्का ने 1336 ई. में की। यह शहर तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित था और व्यापार, संस्कृति तथा सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र था। कृष्णदेव राय के शासन में हम्पी अपनी समृद्धि के चरम पर पहुँचा। 1565 के तालीकोटा युद्ध में राजधानी नष्ट हो गई, जिसके बाद शहर सुनसान हो गया। हम्पी की वास्तुकला द्रविड़ शैली का सर्वोत्तम संग्रह है। आज यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

290. वर्तमान समय का _______ विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी।

(a) हम्पी

(b) मैसुरू

(c) बेलूर

(d) श्रीरंगपट्टणम

Ans. (a) हम्पी

[RRB NTPC 19.04.2016 (Shift-3) Stage 1st]

Explain :- वर्तमान में हम्पी, जो कर्नाटक राज्य में स्थित है, प्राचीन विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। इसकी स्थापना 1336 ई. में हरिहर और बुक्का ने की थी। हम्पी का स्वर्ण युग कृष्णदेव राय के समय (1509–1529) माना जाता है। तुंगभद्रा नदी के किनारे बसे इस नगर में द्रविड़ स्थापत्य की अद्भुत विरासत मिलती है। 1565 के तालीकोटा युद्ध के बाद यह नगर वीरान हो गया। आज हम्पी विश्व धरोहर स्थल के रूप में संरक्षित है।

291. विजयनगर राजवंश के उस शासक का नाम बताइए, जिसने 16वीं पदद शताब्दी में शासन किया।

(a) पुलकेशिन द्वितीय

(b) राजा राज चोल

(c) आदि शंकर

(d) कृष्णदेव राय

Ans. (d) कृष्णदेव राय

[RRB NTPC 04.03.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के तुलुव वंश के महान शासक थे, जिन्होंने 1509 से 1529 ईस्वी तक शासन किया। यह काल 16वीं शताब्दी का सबसे समृद्ध और शक्तिशाली दौर माना जाता है, जिसे “विजयनगर का स्वर्ण युग” कहा जाता है। उनके शासन में हम्पी व्यापार, कला, साहित्य और वास्तुकला का प्रमुख केंद्र बना। वे प्रसिद्ध तेलुगु काव्य “आमुक्तमाल्यदा” के रचयिता थे। उनकी विजयों में बीजापुर, गोलकोंडा और उड़ीसा के विरुद्ध अभियान प्रमुख थे। कृष्णदेव राय दक्षिण भारत के सबसे सफल शासकों में गिने जाते हैं।

292. गोलकोंडा किला _______ के दौरान बनाया गया था –

(a) विजयनगर साम्राज्य

(b) कुतुब शाही राजवंश

(c) सातवाहन राजवंश

(d) होयसल राजवंश

Ans (*)

[RRB NTPC 19.04.2016 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- गोलकोंडा किले का मूल रूप काकतीय/वारंगल के राजाओं द्वारा 12वीं–13वीं सदी में मिट्टी के किले के रूप में बनाया गया था। बाद में यह बहमनी साम्राज्य के नियंत्रण में आया और 1512 ईस्वी में कुतुबशाही वंश के हाथों में चला गया। कुतुबशाही शासकों—विशेषकर कुतुबुल-मुल्क और इब्राहीम कुतुबशाह—ने किले का बड़ा विस्तार और मजबूत पत्थर संरचनाएँ बनवाईं। 16वीं–17वीं शताब्दी में यही किला कुतुबशाही साम्राज्य की राजधानी रहा। किले की ध्वनिक संरचना, जल प्रणाली और सुरक्षा दीवारें कुतुबशाही स्थापत्य की पहचान हैं।

293. प्रसिद्ध गोलकुंडा किला किस राज्य में स्थित है ?

(a) मध्य प्रदेश

(b) तेलंगाना

(c) कर्नाटक

(d) बिहार

Ans. (b) तेलंगाना

[RRB NTPC 11.04.2016 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- गोलकोंडा किला वर्तमान तेलंगाना राज्य में, हैदराबाद शहर से लगभग 11 किलोमीटर पश्चिम स्थित है। यह कुतुबशाही राजाओं की राजधानी रहा और 16वीं–17वीं सदी में अत्यंत समृद्ध नगर था। किला अपनी अनोखी ध्वनि प्रणाली, विशाल प्राचीरों और हीरे की खानों (कोहिनूर सहित) के लिए प्रसिद्ध था। यह क्षेत्र पहले काकतीय साम्राज्य का भाग था, बाद में बहमनी और कुतुबशाही सत्ता के अधीन आया। आज यह तेलंगाना का सबसे प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थल माना जाता है।

294. विजयनगर साम्राज्य के पहले राजा कौन थे ?

(a) बुक्काराय

(b) कृष्णदेवराय

(c) हरिहर । (प्रथम)

(d) रामदेवराय

Ans. (c) हरिहर ।

[RRB NTPC 16.04.2016 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- हरिहर प्रथम विजयनगर साम्राज्य के प्रथम शासक तथा संगम वंश के संस्थापक थे। उन्होंने अपने भाई बुक्का प्रथम के साथ 1336 ईस्वी में विजयनगर (हम्पी) की स्थापना की। यह साम्राज्य दक्षिण भारत में मुस्लिम आक्रमणों के विरुद्ध एक सशक्त हिंदू शक्ति के रूप में उभरा। हरिहर प्रथम ने प्रशासन और सेना की मजबूत नींव रखी। उनके शासनकाल में विजयनगर धीरे-धीरे एक बड़े साम्राज्य के रूप में विकसित हुआ। वे प्रारंभिक राजधानी को स्थिर करने के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

295. उस इंजीनियर का नाम बताइए, जो हम्पी के खंडहरों को दुनिया के समक्ष लाया था ?

(a) कर्नल कॉलिन मैकेंजी

(b) जेम्स एटकिंसन

(c) मैथ्यू बोल्टन

(d) एडवर्ड बालों

Ans. (a) कर्नल कॉलिन मैकेंजी

[RRB NTPC 15.03.2021 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- कर्नल कॉलिन मैकेंजी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रथम सर्वेयर जनरल थे। उन्होंने लगभग 1800 ईस्वी में हम्पी के विस्तृत अवशेषों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। उनके सर्वे और नक्शों ने दुनिया को विजयनगर साम्राज्य की भव्यता से परिचित कराया। मैकेंजी ने हम्पी के मंदिरों, शिलालेखों और स्थापत्य के विस्तृत विवरण एकत्र किए। उनका संग्रह अब भारतीय इतिहास और पुरातत्व अध्ययन की महत्वपूर्ण आधार सामग्री है। उन्हें हम्पी को विश्व के सम्मुख लाने का श्रेय दिया जाता है।

296. विख्यात महिला-कवयित्री और भगवान कृष्ण की भक्त मीराबाई, वर्तमान _______ की एक राजपूत राजकुमारी थीं। 

(a) आंध्र प्रदेश

(b) राजस्थान

(c) उड़ीसा

(d) गुजरात

Ans. (b) राजस्थान

[RRB NTPC 13.06.2022 (Shift-2) Stage 2nd]

Explain :- मीराबाई राजस्थान के नागौर जिले के पास स्थित मेड़ता राज्य की राजकुमारी थीं। उनका जन्म लगभग 1498 ईस्वी में हुआ और वे भगवान कृष्ण की महान भक्त तथा प्रसिद्ध भक्ति-कालीन कवयित्री थीं। मीरा विवाह के बाद मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ पहुँचीं, लेकिन उन्होंने अपना जीवन कृष्ण-भक्ति में समर्पित कर दिया। उनके पद भारतीय भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। राजस्थान की राजपूताना संस्कृति ने उनकी आध्यात्मिक भावना को विशिष्ट रूप दिया। वे संत-कवियों में सर्वोच्च स्थान रखती हैं।

297. ‘दासबोध’ मुख्य रूप से _______ की रचनाओं और उपदेशों का संकलन है। 

(a) रामानुज

(b) चैतन्य

(c) समर्थ रामदास

(d) कबीर

Ans. (c) समर्थ रामदास

[RRB NTPC 16.06.2022 (Shift-3) Stage 2nd]

Explain :- ‘दासबोध’ समर्थ रामदास द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण धार्मिक-आध्यात्मिक ग्रंथ है। रामदास जी 17वीं शताब्दी के संत थे और शिवाजी महाराज के गुरु माने जाते हैं। दासबोध में उनके उपदेश, जीवन-नीति, भक्ति सिद्धांत और व्यवहारिक जीवन का मार्गदर्शन मिलता है। यह ग्रंथ प्रश्न-उत्तरों और संवाद शैली में लिखा गया है। महाराष्ट्र के भक्ति और आध्यात्मिक साहित्य में इसकी गणना प्रमुख ग्रंथों में की जाती है। यह साधना, नीति और धर्म के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

298. माधवाचार्य (12वीं शताब्दी) ने माधव निदान की रचना की, जिसमें अध्याय विशिष्ट रूप से रोगों को ज्ञात करने (निदान) पर आधारित हैं।

(a) 90

(b) 69

(c) 96

(d) 60

Ans. (b) 69

[RRB NTPC 12.06.2022 (Shift-2) Stage 2nd]

Explain :- ‘माधवनिदान’ आयुर्वेद का प्रसिद्ध निदान-ग्रंथ है, जिसका लेखन माधवाचार्य ने किया। इसमें कुल 69 अध्याय हैं, जिनमें रोगों के कारण, लक्षण और निदान का विस्तृत वर्णन है। इस ग्रंथ को आयुर्वेद के “निदान स्थान” का आधार माना जाता है। माधवाचार्य को सामान्यतः 7वीं–8वीं सदी के बाद के काल का विद्वान माना जाता है। यह ग्रंथ चिकित्सकों के लिए रोग-निदान की मूलाधार पुस्तक बन गया। आज भी आयुर्वेद की शिक्षा में यह प्रमुख स्रोत है।

299. मीराबाई कहां की राजपूत राजकुमारी थी ?

(3) मेवाड़

(b) मेड़ता

(c) सतारा

(d) बीजापुर

Ans. (b) मेड़ता

[RRB NTPC 06.04.2021 (Shift-2) Stage 1st]

Explain :- मीराबाई राजस्थान के मेड़ता राज्य की राजकुमारी थीं और उनका जन्म नागौर जिले के पास लगभग 1498 ईस्वी में हुआ था। वे बचपन से ही भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहीं। विवाह के बाद भी उन्होंने अपना जीवन भक्ति और पद-रचना को समर्पित किया। भक्ति आंदोलन में मीरा के पद अत्यंत लोकप्रिय हैं और प्रेम-भक्ति की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करते हैं। मेड़ता उनके जीवन की मूल जन्मभूमि और सांस्कृतिक आधार रहा। वे राजपूताना संस्कृति और कृष्ण-भक्ति दोनों की प्रतिनिधि मानी जाती हैं।

300. विशिष्टाद्वैत दर्शन के संस्थापक कौन थे ?

(a) विष्णु स्वामी

(c) निम्बार्क

(b) माधवाचार्य

(d) रामानुजाचार्य

Ans. (d) रामानुजाचार्य

[RRB NTPC 30.12.2020 (Shift-1) Stage 1st]

Explain :- रामानुजाचार्य विशिष्टाद्वैत दर्शन के प्रवर्तक और दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव संत थे। उनका जीवनकाल लगभग 1017 से 1137 ईस्वी माना जाता है। विशिष्टाद्वैत दर्शन में ब्रह्म और जीव का संबंध अद्वैत तो है, लेकिन गुण-सहित अद्वैत रूप में माना गया है। उन्होंने भक्ति को मुक्ति का मुख्य मार्ग बताया, जिससे बाद में भक्ति आंदोलन को गहरा प्रेरणा मिली। श्रीरंगम् और कांचीपुरम उनके प्रचार-प्रसार के प्रमुख केंद्र रहे। आज भी श्रीवैष्णव परंपरा में उनका स्थान सर्वोच्च है।

 

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